हरियाणा इस वक्त यमुना के उफान से जूझ रहा है। हरियाणा के 6 जिलों, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल को अपनी चपेट में ले रही है। हथिनीकुंड बैराज से लगातार लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने का असर 6 जिलों के करीब 100 गांवों और खेतों पर साफ दिखाई दे रहा है। कहीं हजारों एकड़ में खड़ी फसल डूब गई है, तो कहीं मिट्टी के कट्टों और जेसीबी मशीनों के सहारे पानी को गांवों में घुसने से रोका जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि हालात काबू में हैं, लेकिन जिन किसानों की जमीन और फसल यमुना में समा गई है। यमुना से सटे इन 6 जिलों में नदी ने किस तरह से अलग-अलग रूप में तबाही मचाई है विभिन्न जिलों का हाल कुछ इस प्रकार से है।
करनाल: दो दर्जन से ज्यादा गांवों में खतरा नहरी विभाग करनाल के एक्सईएन मनोज कुमार ने बताया कि जिले में यमुना करीब 70 किलोमीटर एरिया में बहती है और फिलहाल जलस्तर 1.50 लाख क्यूसेक के आसपास है। करनाल जिले में यमुना से लगभग दो दर्जन गांव जुड़े हैं। घरौंडा हल्के के गढ़ीभरल, बल्हेड़ा, मुंडोगढ़ी, सदरपुर, लालुपुरा, मंगलौरा, दिलावरा, अंधेड़ा, ढाकवाला, जम्मूखला, चुंडीपुर, नलीपार, खिराजपुर और महमदपुर समेत कई गांव नदी किनारे बसे हैं। वहीं, इंद्री हलके के नबियाबाद, जपती छपरा, सैयद छपरा, मूसेपुर, समसपुर, कलसौरा, नगली, डेरा हलवाना और गढ़पुर टापू सहित अन्य गांव भी यमुना से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में पानी नहीं घुसा है, इसलिए आबादी सुरक्षित है, लेकिन यमुना के पानी के कारण खेतों में खड़ी हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मिट्टी के कट्टे भरवाए गए हैं और जेसीबी मशीनें व ट्रैक्टर-ट्रालियां लगातार तैनात हैं।
सोनीपत: 150 एकड़ जमीन व फसल का कटाव सोनीपत के डीसी सुशील सारवान ने बताया कि गन्नौर से दिल्ली बॉर्डर तक यमुना करीब 30 किलोमीटर तक बहती है। यहां जलस्तर 3.30 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है। गन्नौर से दिल्ली बॉर्डर तक करीब 30 गांव नदी से सटे हैं, जिनमें बेगा, घसोली, पबनेरा, ग्यासपुर, गढ़ी, मिमारपुर, रसूलपुर, बख्तावरपुर, पबसरा, मनौली, टोकी, जगदीशपुर, दहिसरा और जांटी प्रमुख हैं। डीसी सुशील ने कहा कि बांध के भीतर दर्जनभर गांवों के खेतों में पानी भर गया है, जिससे हजारों एकड़ फसल तबाह हो गई है, हालांकि आबादी पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। सिंचाई विभाग के अधिकारी अश्वनी कौशिक ने बताया कि गांवों तक पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन खेत डूब गए हैं। पबनेरा गांव के सरपंच प्रतिनिधि प्रदीप कुमार ने कहा कि 2011 में भी 200 एकड़ जमीन यमुना में समा गई थी। इस बार भी करीब 150 एकड़ जमीन व फसल का कटाव हो चुका है। स्थानीय किसान अंगूरी ने बताया कि खेतों में पानी भरने से पशुओं के लिए चारे की किल्लत खड़ी हो गई है। मिमारपुर घाट के पास खड़ी सब्जियां पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिससे बाजार में महंगाई बढ़ने लगी है।
पलवल: 5 हजार एकड़ में खड़ी फसल डूबी एसडीओ रियाज अहमद ने बताया कि पलवल जिले मे ं यमुना 45.2 किलोमीटर एरिया में बहती है। मंगलवार शाम को जलस्तर 613 फीट तक पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 615 फीट है। फिलहाल जलस्तर 612.5 फीट पर है। जिले के सोलड़ा, भोलड़ा, बागपुर, इंदिरा नगर, फाट नगर, महाबलीपुर, अच्छेजा, पहलादपुर, गुरवाड़ी, चांदहट, कुशक और बडोली सहित करीब 25 गांव नदी से सटे हैं। अब तक 5 हजार एकड़ में खड़ी फसल डूब चुकी है। महाबलीपुर, इंदिरानगर और अच्छेजा जैसे आधा दर्जन गांवों में घरों तक पानी पहुंचने का खतरा है। प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी की है। अच्छेजा गांव के सरकारी स्कूल में राहत शिविर लगाने की योजना है। साथ ही सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल शुरू किया है, जिस पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। रियाज अहमद ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 3 लाख 11 हजार क्यूसेक पानी मंगलवार रात से जिले में पहुंचना शुरू होगा, जिसके लिए अलर्ट जारी है।
यमुनानगर: 50 हजार की आबादी होती है प्रभावित यमुनानगर के डीसी पार्थ गुप्ता ने बताया कि लापरा, छोटा लापरा, घोड़ो पिपली, टापू माजरी, कमालपुर टापू, पाबनी, नन्हेड़ी, कनालसी, भोगपुर, बीबीपुर, बाकरपुर लाकड़, तेलीपुरा, कैट मंडी और कलेसर समेत कई गांव यमुना किनारे बसे हैं। यहां करीब 50 हजार की आबादी हर साल बाढ़ के डर में जीती है। एसडीएम विश्वनाथ ने कहा कि मांडेवाला, कलेसर, नवाजपुरा, टापू कमालपुर, बेलगढ़ और कलानौर में भूमि कटाव हुआ है। 100 एकड़ से ज्यादा फसलें डूब चुकी हैं और 50 एकड़ खेती नदी में समा गई। उपायुक्त ने जिला सचिवालय में बाढ़ बचाव तैयारियों की समीक्षा की और सिंचाई विभाग, नगर निगम व पीडब्ल्यूडी को खेतों से पानी निकालने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग के अनुसार, हथिनीकुंड बैराज पर पानी का स्तर अब घट रहा है। मंगलवार सुबह 11 बजे 1,51,393 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, दोपहर 12 बजे यह 1,55,958 क्यूसेक तक पहुंचा, शाम 4 बजे 1,55,467 क्यूसेक रहा और शाम 6 बजे घटकर 1,42,024 क्यूसेक रह गया।
पानीपत: गांव-गांव में तैनात है जेसीबी केंद्रीय जल बोर्ड के जेई सहायक सोनू सैनी ने बताया कि पानीपत में यमुना का जलस्तर 232.10 मीटर चल रहा है, जो अब घट रहा है। हथिनीकुंड बैराज से 3,29,642 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिले में यमुना करीब 35 किलोमीटर तक फैली है। यूपी की तरफ 12 और हरियाणा की तरफ 15 गांव नदी से सटे हैं। यूपी में करीब सवा लाख और हरियाणा में 75-80 हजार आबादी रहती है। सोनू सैनी के मुताबिक, प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। गांव-गांव में जेसीबी तैनात हैं और ग्रामीणों के सहयोग से मिट्टी के कट्टे भरवाए जा रहे हैं। पत्थरगढ़ गांव में टूटा बांध जोड़ दिया गया है। प्रभावित गांवों में राणा माजरा, पत्थरगढ़, तामशाबाद, रिसपुर, नन्हेड़ा, जलमाणा, अधमी, मिजार्पुर, गोयला खुर्द, गोयला कलां, संजौली, खोजकीपुर, हथवाला, बिलासपुर और राक्सेड़ा शामिल हैं।
फरीदाबाद: डीसी विक्रम सिंह ने बताया कि फरीदाबाद में यमुना नदी 30 किलोमीटर एरिया में बहती है। फिलहाल जलस्तर 1,02,444 क्यूसेक दर्ज हुआ है। खतरे का निशान 200 मीटर है, जबकि वर्तमान स्तर 199 मीटर पर है। यमुना से जुड़े 26 गांवों में से 14 गांवों में बाढ़ का खतरा है। बसंतपुर, किडावली, लालपुर, महावतपुर, राजपुर कलां, तिलोरी खादर, अमीपुर, चिरसी, मंझावली, चंदपुर, मोठुका, अरुआ, छांयसा और मोहना प्रमुख हैं। बसंतपुर गांव सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 3000 मकानों में आठ हजार की आबादी रहती है। मकानों को खाली कराया जा रहा है। राजपुरा, चांदपुरा और अल्लीपुर समेत कई गांवों में 1500 एकड़ से ज्यादा फसल पानी में डूब गई है।
प्रशासन ने ददसिया, जसाना और कांवरा के बारात घर तथा राजपुर कलां के सामुदायिक भवन को सेफ होम घोषित किया है। तिगांव ब्लॉक के अरुआ और मोठुका गांव में शेल्टर होम स्थापित किए गए हैं। विक्रम सिंह ने बताया कि एसडीआरएफ और पुलिस लगातार लोगों को सुरक्षित निकाल रही है। यमुना हरियाणा की सबसे लंबी नदी है, जो उत्तराखंड के यमुनोत्री से निकलकर यमुनानगर के कालेश्वर वन के पास राज्य में प्रवेश करती है। यह करनाल, पानीपत और सोनीपत से बहते हुए लगभग 320 किलोमीटर की दूरी तय करती है और दिल्ली में प्रवेश कर जाती है। सिंचाई और पेयजल के लिए यह नदी हरियाणा की मुख्य धारा मानी जाती है, यह राज्य में बहने वाली सबसे लंबी नदी भी है। आगे चलकर यह प्रयागराज में गंगा से मिल जाती है।