अबकी बार करनाल के खेतों से धुआं नहीं, बल्कि नई उम्मीदें उठ रही हैं। जिले के किसान तेजी से पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीकें अपना रहे हैं, जिससे पर्यावरण को राहत तो मिल ही रही है, साथ ही खेतों की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ रही है। झांझड़ी गांव के किसान राज मराठा ने इस दिशा में मिसाल पेश करते हुए अपने 10 एकड़ खेत में एसएमएस तकनीक से धान की कटाई कर पराली का सफल प्रबंधन किया है।
अब आसपास कहीं भी पराली जलाने की घटनाएं देखने को नहीं मिलीं
राज मराठा ने बताया कि पहले किसान मजबूरी में पराली में आग लगा देते थे, जिससे हवा जहरीली हो जाती थी और खेत की उपजाऊ मिट्टी भी नष्ट होती थी। लेकिन इस बार उन्होंने पराली को खेत में ही केल्टिवेटर की मदद से मिक्स कर खाद में बदलने की प्रक्रिया अपनाई है। उन्होंने कहा कि अब आसपास कहीं भी पराली जलाने की घटनाएं देखने को नहीं मिलीं — किसान अब जागरूक हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ी को बचाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। किसान के अनुसार, एसएमएस तकनीक से कटाई कराने पर करीब ₹400 अतिरिक्त खर्च जरूर आता है, लेकिन इसके अनेक फायदे हैं — पराली की समस्या से निजात, पर्यावरण की रक्षा और खेत की मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि।
40 प्रतिशत खेतों में पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा चुका
उन्होंने कहा कि पराली सड़कर खाद का काम करती है, जिससे अगली फसल की पैदावार बढ़ जाती है। इस विषय में जानकारी देते हुए कृषि उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिले में अब तक लगभग 60 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है, जिनमें से 40 प्रतिशत खेतों में पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक करने के लिए जिला और खंड स्तर पर कृषि विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पराली जलाने से रोकने के लिए 400 से अधिक टीमें भी गठित की गई हैं।
.....ताकि पराली न जले और खेत की उर्वरता बनी रहे
डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से किसानों को ₹1200 प्रति एकड़ का अनुदान दिया जा रहा है, यदि वे पराली में आग नहीं लगाते। इसके अलावा, कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि किसान “इन-सीटू मैनेजमेंट” (पराली को खेत में ही मिलाना) और “एक्स-सीटू मैनेजमेंट” (पराली को खेत से बाहर उपयोग में लाना) — दोनों तरीकों से इसका प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि इस बार धान की कटाई एसएमएस सिस्टम से युक्त कम्बाइन हार्वेस्टर से करवाएं ताकि पराली न जले और खेत की उर्वरता बनी रहे।