फरवरी माह के पहले पखवाड़े से ही सर्दी छू मंतर हो गई है और गर्मी का असर दिखने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार बीते एक दशक के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि फरवरी के दिनों में इतना अधिक तापमान देखने को मिल रहा है। मौसम ने करवट ली है तो मार्च ही नहीं अप्रैल जैसी गर्मी का अनुभव होने लगा है। दिन में खिल रही तेज धूप के कारण गर्मी बढ़ गई है जो है सुबह और शाम के वक्त ही हल्की फुल्की ठंड का अहसास हो रहा है।
यह तापमान पिछले 14 सालों में फरवरी महीने में सबसे अधिक
दो दिनों के अंदर ही अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस हो चुका है। यह तापमान पिछले 14 सालों में फरवरी महीने में सबसे अधिक है और फरवरी 2016 में 7 फरवरी को इतना तापमान दर्ज किया गया था। हालांकि मौसम विभाग ने एक दो दिनों में उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना जताई है जिससे रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके साथ प्रदेश के कुछ इलाकों में सुबह और देर रात को हल्की धुंध देखने को मिल सकती है।
क्या असर हो सकता है बढ़ते तापमान से
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते तापमान का प्रभाव गेहूं की फसल पर साफ दिखाई देने लगा है। अधिक गर्मी के कारण गेहूं के पौधे बौने रह सकते हैं और उनकी गुणवता को प्रभावित कर सकते हैं इससे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग फसलों की नियमित निगरानी कर रहा है।
अगले पांच दिनों का कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग ने 11 फरवरी तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के चलते 14 से 16 फरवरी के दौरान हवाओं में बदलाव आ सकता है और 16 फरवरी को दक्षिण पश्चिमी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावनाए हैं जिससे दिन के तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है।
गेंहू की फसल को सामान्य तापमान की जरूरत
फरवरी माह में भी गेंहू की फसल को सामान्य तापमान की जरूरत होती है। इस बार फरवरी माह में तापमान बढ़ रहा हैं जिसके कारण किसानों को गेहूं की फसलों की निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विभाग की टीमें भी फसलों की निगरानी कर रही हैं और किसानों को उचित सलाह दे रही हैं। कृषि विभाग पानीपत एसडीओ देवेंद्र कुहाड़।