loader
The Haryana Story | बोर्ड परीक्षा में इन सरल तकनीकों को अपनाने से 'तनाव होगा छू मंतर'

बोर्ड परीक्षा में इन सरल तकनीकों को अपनाने से 'तनाव होगा छू मंतर'

बोर्ड परीक्षा में तनाव से मुक्ति के लिए : श्वास व्यायाम, योग और समय प्रबंधन से बच्चों का प्रदर्शन दोगुना

परीक्षा के दिनों में छात्रों का तनाव एक आम समस्या बन गया है, लेकिन सरल तकनीकों जैसे श्वास व्यायाम, योग और समय प्रबंधन से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। ये विधियां न केवल एकाग्रता बढ़ाती हैं, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाती हैं। ये कहना है प्रिंसिपल डॉ. अनुज सिन्हा (सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, पानीपत) का। उन्होंने कहा नियमित अभ्यास से छात्र न केवल बेहतर स्कोर हासिल करते हैं, बल्कि आत्मविश्वास से भरे रहते हैं।

समय प्रबंधन: घबराहट को कहें बाय-बाय पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर दैनिक समय-सारणी बनाएं, जिसमें पढ़ाई के बीच ब्रेक जरूर शामिल हों। उदाहरण के लिए, 25 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक लें। इससे अंतिम समय की घबराहट कम होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। रोजाना 1 घंटा नियमित रिवीजन के लिए निकालें। मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग सीमित रखें ताकि फोकस बना रहे। 

श्वास और ध्यान: मन को शांत रखने का राजगहरी सांस लेने की 4-7-8 विधि अपनाएं—4 सेकंड सांस अंदर लें, 7 सेकंड रोकें और 8 सेकंड में बाहर निकालें। रोज 5-10 मिनट माइंडफुलनेस या ध्यान करें। यह चिंता को तुरंत कम करता है। प्रिंसिपल डॉ. अनुज सिन्हा ने कहा योगासनों जैसे शवासन या बालासन भी चमत्कारी असर दिखाते हैं, जो तनाव मुक्ति देते हैं और नींद सुधारते हैं।

शारीरिक गतिविधि और आहार : ऊर्जा का स्रोतरोज 30 मिनट वॉकिंग, योग या खेलकूद करें। इससे एंडोर्फिंस रिलीज होते हैं, जो 'खुशी के हार्मोन' कहलाते हैं। दिमाग तरोताजा रहता है और नींद गहरी आती है। जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें। खूब पानी पिएं और पौष्टिक भोजन जैसे फल-सब्जियां लें।

माता-पिता और स्कूल की भूमिका : प्रिंसिपल डॉ. अनुज सिन्हा ने कहा सहयोग से सफलता माता-पिता बच्चों से खुलकर बात करें, उनकी भावनाओं को स्वीकारें और सकारात्मक प्रोत्साहन दें। दबाव बनाने के बजाय स्वस्थ आदतें सिखाएं। स्कूलों में तनाव प्रबंधन पर कार्यशालाएं आयोजित करें, जहां विशेषज्ञ मार्गदर्शन दें। पानीपत के स्थानीय स्कूलों में ऐसी पहल से सैकड़ों छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। ये आसान तकनीकें अपनाकर छात्र परीक्षा को बोझ न मानकर अवसर बना सकते हैं। समाज नेटवर्क अपील करता है कि अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों का मार्गदर्शन करें।

Join The Conversation Opens in a new tab
×