क्षेत्र के कालरो गांव में पंचायती भूमि पर हो रहे खनन को लेकर किसानों का गुस्सा भड़क उठा। आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और पंचायत पर गंभीर आरोप लगाए। स्थिति तनावपूर्ण होते देख पुलिस को बुलाना पड़ा, जिसके बाद डायल 112 की टीम ने मौके पर पहुंचकर खनन कार्य को तुरंत प्रभाव से रुकवा दिया। किसानों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सुनियोजित तरीके से उपजाऊ जमीन को “ऊबड़-खाबड़” बताकर मिट्टी बेच रही है।
खनन के कारण भूमिगत पाइपलाइन और ट्यूबवेल सिस्टम को नुकसान पहुंचा
उनका कहना है कि जमीन से 7 से 8 फीट तक गहरी खुदाई की गई है, जिससे भूमि की उर्वरता खत्म हो रही है और आसपास के खेतों पर भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इस तरह की खुदाई से भविष्य में खेती करना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित भूमि पहले पूरी तरह उपजाऊ थी और पंचायत को इससे हर वर्ष अच्छी आमदनी होती थी, लेकिन अब लालच में आकर इसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन के कारण भूमिगत पाइपलाइन और ट्यूबवेल सिस्टम को नुकसान पहुंचा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करने को होंगे मजबूर
मामला उस समय और गरमा गया जब शिकायत के बाद सरपंच द्वारा खुदाई की गई जमीन को दोबारा भरने का प्रयास किया गया। किसानों ने इसे सबूत मिटाने की कोशिश बताते हुए विरोध तेज कर दिया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद काम को बीच में ही रुकवा दिया गया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में पुलिस व बीडीपीओ को लिखित शिकायत देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
पंचायत का पक्ष
सरपंच प्रतिनिधि दीपेंद्र राणा ने बताया कि जमीन की पैमाइश के लिए लेवलिंग जरूरी होती है। यदि ठेकेदार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक खुदाई की गई है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।