मेरठ के सकौती टांडा में 29 मार्च को अंतरराष्ट्रीय जाट संसद द्वारा महाराजा सूरजमल की मूर्ति के अनावरण समारोह के बाद 'जाट' शब्द हटाए जाने को लेकर भारी विवाद हो गया है। सकौती में स्थापित महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के नीचे शिलालेख पर "जाट" शब्द लिखा हुआ था। अनावरण समारोह के दौरान या उससे ठीक पहले पुलिस प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए इस शब्द को वहां से हटवा दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता संजीव बालियान, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई।
इन पॉइंट्स से जाने पूरा घटनाक्रम
- सकौती में 29 मार्च को मूर्ति का उद्घाटन हुआ था।
- प्रशासन ने राजा सूरजमल की मूर्ति के नीचे लिखा "जाट" शब्द हटाया गया।
- संजीव बालियान, हनुमान बेनीवाल समेत कई नेताओं की आपत्ति।
- संगठन नेता मनु दांतल का समर्थकों संग धरना। मनु दांतल का जाट युवाओं को आने का आह्वान।
- अंतरराष्ट्रीय जाट संसद कार्यक्रम के बाद धरना।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे
उन्होंने मंच से कहा कि प्रशासन को जाट शब्द से क्या दिक्कत है? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह शब्द वापस नहीं लिखा गया तो वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। “पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता संजीव बालियान ने सकौती में हुए जाट सम्मेलन में संगीत सोम को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा ‘मेरा जो अपमान हुआ है, उसे मैं भूलने नहीं दूंगा। अगर तुम भूल गए तो भी मैं याद दिलाता रहूंगा, और अगर मैं कभी भूल जाऊं तो तुम मुझे याद दिलाते रहना।’”पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने भी मामले पर सफाई दी और कहा कि जो गांव के लोग चाहेंगे, वही शब्द वहां लिखा जाएगा।
विवाद का मुख्य कारण
प्रतिमा के नीचे लगे शिलालेख पर पहले "जाट" शब्द लिखा गया था, जिसे अनावरण से पूर्व कथित तौर पर प्रशासन द्वारा हटा दिया गया। पुलिस और प्रशासन का तर्क है कि महापुरुष पूरे राष्ट्र के होते हैं और उन्हें किसी एक जाति के दायरे में बांधना उचित नहीं है। अधिकारियों ने 16 सितंबर 2025 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग वर्जित है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महाराजा सूरजमल जाट समाज की अस्मिता के प्रतीक हैं और उनके नाम के साथ उनकी पहचान (जाट शब्द) जुड़ी रहनी चाहिए।
नेताओं की भागीदारी
पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल हुए, जिन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के अध्यक्ष मनु चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर "जाट" शब्द वाला शिलालेख दोबारा नहीं लगाया गया, तो देशव्यापी आंदोलन और बड़ी महापंचायत की जाएगी। एसडीएम ने 10 दिन का समय मांगते हुए कहा है कि पट्टिका को खोजकर उचित प्रक्रिया के तहत लगाने का प्रयास किया जाएगा। यह विवाद वर्तमान में जाट बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है।
सीएम भगवंत सिंह मान ने मंच से कहा मैं और बेनीवाल नहीं डरते
संगठन के युवा नेता मनु दांतल समर्थकों के साथ मूर्ति के पास ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने देशभर के जाट युवाओं से सकौती पहुंचने का आह्वान किया है, ताकि समाज के सम्मान की लड़ाई लड़ी जा सके। जाट समाज के लोगों ने प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है कि वे 'जाट' शब्द को वापस शिलालेख पर अंकित करें। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि 16वें दिन तक मांग पूरी नहीं हुई, तो समाज खुद कड़ा निर्णय लेगा। बता दें कि इस भव्य मूर्ति का अनावरण पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम में जयंत चौधरी, संजीव बालियान और हनुमान बेनीवाल जैसे कई दिग्गज नेताओं को आमंत्रित किया गया था। वहीं पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने मंच से कहा मैं और बेनीवाल नहीं डरते, संजीव बालियान ने कहा मैं भी नहीं डरता। बालियान ने इसे ने अपनी पहचान और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। बेनीवाल ने साफ कहा अपनी पहचान और सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा।
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