दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मशहूर शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बड़ा एलान किया है। टिकैत ने केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पूरी तरह तैयार हैं और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बड़ा जनसैलाब उमड़ेगा।
सोनम वांगचुक की तबीयत बेहद नाजुक
नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के साथ मिलकर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की हालत लगातार बिगड़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, 19-20 दिनों से भूखे रहने के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है। जांच करने वाले डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे अनशन की वजह से उनके शरीर के आंतरिक अंगों पर बुरा असर पड़ना शुरू हो सकता है, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। गंभीर स्थिति के बावजूद वांगचुक ने अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
राकेश टिकैत का दिल्ली से बड़ा एलान और सरकार को चेतावनी
किसान नेता राकेश टिकैत खुद जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। धरना स्थल पर प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा 'आप लोग चिंता मत करो, किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सब तैयार खड़ी हैं। यह सरकार तानाशाह है, जो सोचती है कि आंदोलनकारी खुद दम तोड़ दें। लेकिन युवाओं और छात्रों की इस लड़ाई में देश का किसान उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। इस तानाशाह बादशाह का अंत होकर रहेगा।' टिकैत ने घोषणा की है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च के दौरान देश भर के किसान और युवा एकजुट होकर जंतर-मंतर पर अपनी ताकत दिखाएंगे।
विपक्ष और अन्य नेताओं का भी मिला भारी समर्थन
जंतर-मंतर पर चल रहा यह छात्र आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मंच का रूप ले चुका है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुंचीं और उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और सपा छात्रों के इस संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने 20 जुलाई के मार्च में सभी विपक्षी दलों और युवाओं से जुड़ने की अपील की है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया है। आंदोलन स्थल पर पहले ही लगभग 500 से अधिक किसान पहुंच चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे। अब सभी की नजरें 20 जुलाई पर टिकी हैं, जब राकेश टिकैत के आह्वान पर किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं, जिससे राजधानी में सुरक्षा और राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।
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