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The Haryana Story | 73 की उम्र में बदली खेती की राह: रिटायर्ड SDO ने 14 एकड़ में खड़ा किया मछली पालन का कारोबार, हर महीने लाखों की कमाई

73 की उम्र में बदली खेती की राह: रिटायर्ड SDO ने 14 एकड़ में खड़ा किया मछली पालन का कारोबार, हर महीने लाखों की कमाई

पानीपत के जगदीश संधू ने पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया मछली पालन, 4 एकड़ से शुरू किया मछली पालन, अब 14 एकड़ में फैला कारोबार

प्रतीकात्मक तस्वीर

पानीपत। उम्र के इस पड़ाव पर जब अधिकांश लोग आराम की जिंदगी पसंद करते हैं, वहीं पानीपत के गांव खोतपुरा निवासी 73 वर्षीय जगदीश संधू ने खेती में नया प्रयोग कर मिसाल कायम की है। सिंचाई विभाग में SDO के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया। जगदीश संधू के अनुसार, उन्होंने मछली पालन शुरू करने से पहले मत्स्य पालन विभाग से प्रशिक्षण लिया और विभागीय योजनाओं की जानकारी हासिल की। शुरुआत करीब चार एकड़ क्षेत्र से की गई। काम का अनुभव बढ़ने के साथ उन्होंने इसका विस्तार किया और अब करीब 14 एकड़ क्षेत्र में मछली पालन कर रहे हैं। 

करीब 8 लाख रुपये प्रतिमाह तक की आमदनी हो रही

उनके फार्म पर इंडियन मेजर कॉर्प, रूपचंद और पंगास कैटफिश जैसी प्रजातियों का पालन किया जा रहा है। संधू का कहना है कि मछली पालन से उन्हें करीब 8 लाख रुपये प्रतिमाह तक की आमदनी हो रही है। हालांकि यह आय व्यवसाय की लागत, उत्पादन और बिक्री के अनुसार बदल सकती है। खोतपुरा के इस किसान परिवार का मछली पालन से जुड़ाव नया नहीं है। हरियाणा मत्स्य विभाग की अगस्त 2026 की एक सफलता-कहानी में जगदीश संधू के बेटे संदीप का भी उल्लेख है। विभाग के अनुसार संदीप ने मत्स्य विभाग के जागरूकता शिविर से प्रेरित होकर प्रशिक्षण लिया और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत सहायता लेकर मछली पालन शुरू किया। 

हरियाणा सरकार की ओर से दो बार सम्मानित

जगदीश संधू के अनुसार, मछली पालन के क्षेत्र में उनके काम को देखते हुए उन्हें हरियाणा सरकार की ओर से दो बार सम्मानित भी किया जा चुका है। उनका मानना है कि खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखने के बजाय किसान अपनी जमीन और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मछली पालन, पशुपालन और अन्य वैकल्पिक गतिविधियों को भी अपना सकते हैं। संधू की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि नई शुरुआत के लिए उम्र बाधा नहीं होती। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जिस तरह खेती के साथ नया प्रयोग किया, वह दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं की जानकारी, तकनीक और बाजार की समझ के साथ किसान कृषि से जुड़े वैकल्पिक व्यवसायों में अपनी आय के नए रास्ते तलाश सकते हैं।

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