फसलों में यूरिया व दवाइयां के अंधाधुंध प्रयोग से जमीन की घटती उर्वरक शक्ति और बिगड़ती सेहत को बनाए रखने के लिए हरियाणा सरकार ने फसलों में जैविक खाद के इस्तेमाल करने की योजना लागू की है। इस योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के सात जिलों को ट्रायल के तौर पर चिन्हित किया गया है। इनमें से पानीपत जिले में मतलौडा ब्लॉक को ट्रायल के लिए चुना गया है। जहां पर 125 एकड़ में जैविक खाद का प्रयोग करके जमीन की सेहत को परखा जाएगा।
जैविक खाद को किसानों के खेतों में सरकार की तरफ से फ्री डाला जाएगा
इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए कृषि विभाग के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ देवेंद्र कुहाड़ शुक्रवार को मतलौडा कृषि कार्यालय में कर्मचारियों की बैठक लेने पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को कहा कि क्षेत्र के कुछ जागरूक किसानो को चिन्हित करके इस योजना में शामिल करें। इस योजना की विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ देवेंद्र कुहाड़ ने बताया कि गोबर गैस प्लांट से गोबर का प्रयोग करने के बाद जो खाद निकलती है। उस जैविक खाद को किसानों के खेतों में सरकार की तरफ से फ्री डाला जाएगा। इसके लिए सरकार ने प्रदेश के ट्रायल के लिए सात जिलों का चयन किया गया है।
इन जिलों में होगा ट्रायल
इनमें फतेहाबाद, हिसार, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, रोहतक व सोनीपत जिलों का चयन किया गया है। कृषि विभाग जिन किसानों को जैविक खाद फ्री वितरित करेगा। उस खेत की मिट्टी की जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे और इस खाद के प्रयोग करने के 6 महीने बाद फिर उस जमीन का सैंपल लिया जाएगा। इससे विभाग यह देखेगा की इस जैविक खाद्य के प्रयोग से जमीन की उर्वरक शक्ति वह फसल के गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ है। इस जैविक खाद के प्रयोग से जमीन की सेहत व पैदावार में अगर सुधार पाया गया तो गेंहू की फसल में जैविक खाद के प्रयोग का दायरा और बढ़ा दिया जाएगा।