loader
The Haryana Story | 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत  काफी कारगर सिद्ध हो रहे सरकारी प्रयास, साप्ताहिक लिंगानुपात सुधरकर हुआ 917

'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत काफी कारगर सिद्ध हो रहे सरकारी प्रयास, साप्ताहिक लिंगानुपात सुधरकर हुआ 917

बैठक में अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने और 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत राज्य के लिंगानुपात में और सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने पर चर्चा की गई

प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव के निर्देश पर हरियाणा में लिंगानुपात की स्थिति पर समीक्षा करने के लिए गठित राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की हर सप्ताह बैठक की जाती है। इसी कड़ी में मंगलवार को महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) मनीष बंसल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में अवैध गर्भपात पर अंकुश लगाने और 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत राज्य के लिंगानुपात में और सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने पर चर्चा की गई। सरकारी प्रयास काफी कारगर सिद्ध हो रहे हैं और पिछले सप्ताह (14 से 21 जुलाई, 2025) में हरियाणा का लिंगानुपात सुधरकर 917 हो गया, जो पिछले वर्ष इसी सप्ताह 860 था।

सबसे ज्यादा संख्या अंबाला में दर्ज की गई

यदि 1 जनवरी से 21 जुलाई तक की गणना की जाए तो राज्य का लिंगानुपात इस वर्ष 904 पर 2 अंक की वृद्धि के साथ दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 902 था। डॉ. बंसल ने अधिकारियों को ने अवैध गर्भपात के खिलाफ सख्त निगरानी रखने के आदेश दिए और कहा कि दोषी पाए गए, डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करने सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए। राज्य सभी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) और 12 सप्ताह से अधिक के गर्भपात के मामलों की रिवर्स ट्रैकिंग लागू कर रहा है, खासकर जहां महिलाओं को पहले से ही एक या अधिक बेटियां हैं। अब तक प्रदेश भर में 690 रिवर्स ट्रैकिंग पूरी हो चुकी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या अंबाला में दर्ज की गई है।

संदिग्ध मामलों में कुल 18 एफआईआर दर्ज और 13 और एफआईआर वर्तमान में प्रक्रिया में

इसके चलते संदिग्ध मामलों में कुल 18 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 13 और एफआईआर वर्तमान में प्रक्रिया में हैं। कई निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिन पर कदाचार का संदेह है, साथ ही संबंधित गर्भवती महिलाओं से जुड़े चिकित्सा अधिकारियों, आशा, एएनएम और सहेलियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

डीजीएचएस (पी) कुलदीप सिंह ने सभी सीएमओ और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और उन्हें गर्भपात के मामलों की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर रिवर्स ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सीएमओ से पिछले तीन महीनों के एमटीपी मामलों के आंकड़े भी मांगे और गर्भपात के मामलों पर प्रभावी नजर रखने के लिए ओपीडी केंद्रों पर स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ समन्वय पर जोर दिया।

Join The Conversation Opens in a new tab
×