हरियाणा सरकार के आदेश पर पंचायती राज विभाग के द्वारा वर्ष 2004 से पहले ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा करने वाले लोग कलेक्टर रेट से डेढ़ गुना ज्यादा पैसे जमा करवाकर उस जमीन को अपने नाम कर सकते हैं, बशर्त कब्जाधारी सरकार के नियमों के अनुसार सारे कागजात पूरा करने वाला होना चाहिए, उसके पास पुराना चूल्हा टैक्स, निशानदेही कोर्ट केस बिजली या पानी बिल के अलावा अन्य कोई भी 20 वर्षों पुराना प्रूफ होना चाहिए। उक्त बातें पंचायती राज विभाग के डी.डी.पी.ओ. राजेश शर्मा ने समालखा की खंड विकास एवं पंचायत कार्यालय में सरपंचों और ग्राम सचिवों की मीटिंग को संबोधित करते हुए कही।
विभाग की ओर से कुछ शर्ते ऐसी हैं जो कब्जाधारी को पूरी करनी होगी
डी.डी.पी.ओ. राजेश शर्मा ने सरपंचों और सचिवों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की इच्छा है कि गांव–गांव से पंचायत की जमीन से विवाद खत्म हो और उस पर जो कब्जाधारी हैं उनको उनका मालिकाना हक मिले, इसको लेकर पंचायती राज विभाग की ओर से यह स्कीम चालू की गई है। राजेश शर्मा ने बताया कि इसमें विभाग की ओर से कुछ शर्ते ऐसी हैं जो कब्जाधारी को पूरी करनी होगी। राजेश शर्मा ने यह भी कहा कि जो कब्जाधारी हैं उन्होंने गांव की फिरनी, जोहड़ और रास्तों पर कब्जा नहीं कर रखा हो, यह भी शर्तों में लागू होगा, क्योंकि जिन्होंने फिरनी, जोहड़ और रास्तों पर कब्जा कर रखा होगा यह उस स्कीम में लागू नहीं हो सकता। राजेश शर्मा ने यह भी कहा कि जिस जमीन पर कब्जा कर रखा है वह 500 गज तक होनी चाहिए, यानी इससे ऊपर नहीं होनी चाहिए।
जो व्यक्ति शर्तों को पूरा करता हो वह इस स्कीम से संबंधित सभी कागजात ग्राम पंचायत को देगा
जिला विकास पंचायत अधिकारी राजेश शर्मा ने सरपंचों और ग्राम सचिवों को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि जो व्यक्ति उपरोक्त शर्तों को पूरा करता हो वह इस स्कीम से संबंधित सभी कागजात ग्राम पंचायत को देगा और ग्राम पंचायत और सचिव की ओर से खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को इसकी एप्लीकेशन दी जाएगी। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी की ओर से प्रार्थी की ओर से जमीन खरीदने के लिए यानी मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए इस स्कीम से संबंधित जिला उपयुक्त को प्रार्थना की जाएगी और जिला उपयुक्त की ओर से इस बारे में डायरेक्टर पंचायत विभाग को केस भेजा जाएगा और पूरे केस की छानबीन करने के बाद डायरेक्टर पंचायत विभाग की ओर से प्रार्थी को मालिकाना हक दिलाने के लिए जिला प्रशासन और खंड कार्यालय को निर्देश दिए जाएंगे, कुल मिलाकर विभाग की ओर से इसकी अनुमति मिलने पर इस कार्य को करने के लिए ग्राम पंचायत को पूरी अथॉरिटी होगी, यानी ग्राम पंचायत द्वारा कब्जाधारी को मालिकाना हक दिलाने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले दिए गए चूल्हा टैक्स का अब हो सकता है फायदा
कुल मिलाकर वैसे तो समालखा खंड के विभिन्न गांव में इस तरह के काफी ऐसे गांव हैं जिन में पंचायत के जमीन पर कुछ लोगों ने काफी पुराने कब्जे कर रखे हैं, अगर हरियाणा की बात की जाए तो हरियाणा प्रदेश में भी इस तरह के काफी केस हैं, जिसको लेकर सरकार ने यह स्कीम लागू की गई है, क्योंकि काफी सालों पहले गांव में चूल्हा टैक्स लगाने का काम किया जाता था और उस समय चूल्हा टैक्स जो भी परिवार देता था उस परिवार को पहले दिए गए चूल्हा टैक्स का अब फायदा हो सकता है। अगर उस परिवार में से कोई ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा किए हुए होगा तो इस मामले में 2004 यानी 20 वर्ष पहले का प्रूफ देने के लिए या तो कोई 20 साल पहले निशान दही करवाने का कार्य किया गया हो या कोई कोर्ट केस किया गया हो या चूल्हा टैक्स दिया गया हो या बिजली और पानी का बिल हो, इसके अलावा अन्य कोई प्रूफ कब्जाधारी के पास होगा तो वह भी मान्य होगा।
गांव के लोगों के लिए यह बहुत ही फायदा होगा
जिला पंचायत विकास अधिकारी राजेश शर्मा ने सरपंचों की शिकायतों को भी सुना, जिसमें पट्टीकल्याणा गांव के सरपंच मुकेश चौहान ने जिला पंचायत अधिकारी राजेश शर्मा से कहा कि करीब 20 से 25 साल पहले उस समय के सरपंच ने हर्बल को पौधारोपण करने के लिए गांव की करीब 13 एकड़ जमीन दी थी, लेकिन अब पंचायत चाहती है कि गांव में पावर हाउस बनाया जाए, क्योंकि पावर हाउस की जमीन न मिलने के कारण उसको नहीं बनाया जा रहा और अगर गांव में 13 एकड़ जमीन में से करीब 6 एकड़ पंचायत को मिल जाती है तो उसमें खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम भी बनाया जा सकता है, क्योंकि गांव में काफी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं, लेकिन उनके लिए कोई भी खेल स्टेडियम नहीं है, इसलिए सरपंच मुकेश ने कहा कि अगर इस जमीन में से आधी जमीन हमें मिलती है तो गांव के लोगों के लिए यह बहुत ही फायदा होगा।
विभिन्न गांव में जोहड़ों की जमीन पर नाजायज कब्जा
इसके अलावा विभिन्न गांव में जोहड़ों की जमीन पर नाजायज कब्जा होने और उसको किस तरह से छूटवाने का काम किया जाए विभिन्न सरपंचों की ओर से यह मामला भी जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी के समक्ष आया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी गांव के लोगों की ओर से कार्रवाई की जाएगी तो इस मामले का हल निकल सकता है।
डिकाडला गांव के सरपंच सुनील के द्वारा गांव में वर्ष 1982 में गरीब परिवार के लोगों को मिले प्लाटों पर कुछ प्रभावशाली लोगों के द्वारा कब्जा करने और उसे छुड़वाने के लिए पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला पंचायत विभाग का नहीं है, जब उनके नाम रजिस्ट्री है तो वह अपने स्तर पर उस व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट केस करें, जिसने उसकी जमीन पर दबंगई से नाजायज रूप से कब्जा कर रखा है इसके अलावा उसे भाईचारे से भी निपटाया जा सकता है, मीटिंग में विभिन्न गांव के सरपंचों के सामने आ रही समस्याओं को लेकर उन्होंने अपनी अपनी समस्या को जिला पंचायत विकास अधिकारी के सामने रखा, जिसका उन्होंने बहुत अच्छे तरीके से समाधान करने की सलाह दी।