हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार की "हर घर सोलर" (प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना) की आलोचना करते हुए इसे "धोखे का खेल" बताया। उन्होंने सरकार पर एक हाथ से सब्सिडी देकर दूसरे हाथ से वापस लेने का आरोप लगाया। हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के नाम पर उन उपभोक्ताओं पर भारी फिक्स्ड चार्ज लगा रही है जो सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि किसी महीने उपभोक्ता की बिजली उत्पादन उसकी खपत से थोड़ी भी कम रह जाती है, तो सरकार उन पर मोटा फिक्स्ड चार्ज लगाकर पूरा बिल थमा देती है।
सब्सिडी का लालच देकर उन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डाला जा रहा
हुड्डा ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित 15% से 17% बिजली दरों में वृद्धि का भी विरोध किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि ₹75 प्रति किलोवाट के फिक्स्ड चार्ज और स्लैब में बदलाव के कारण ₹900 का बिजली बिल अब ₹4,000 तक पहुँच गया है। हुड्डा ने सरकार की इस नीति को "मुंह में राम बगल में छुरी" के समान बताया, जिसमें जनता को सब्सिडी का लालच देकर उन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डाला जा रहा है।
भाजपा सरकार बिजली उपभोक्ताओं से लगातार ठगी करने में लगी हुई
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि भाजपा सरकार बिजली उपभोक्ताओं से लगातार ठगी करने में लगी हुई है। अब सोलर योजना के नाम पर जनता से ठगी का खेल शुरू हो गया है। हुड्डा ने कहा कि "हर घर सोलर" योजना के नाम पर सरकार मुंह में सब्सिडी और बगल में छुरी वाली नीति अपना रही है। एक ओर सरकार सोलर को बढ़ावा देने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सोलर सिस्टम लगवाने वाले उपभोक्ताओं से महंगे फिक्स्ड चार्ज भी वसूले जा रहे हैं। जिस महीने सोलर उपभोक्ता की बिजली का जनरेशन, उसके खर्च से थोड़ा भी कम रह जाता है तो सरकार उसे महंगा फिक्स्ड चार्ज लगाकर पूरा बिल थमा देती है।
सोलर लगवाने का उपभोक्ता को फायदा क्या हुआ?
ऐसे में सोलर लगवाने का उपभोक्ता को फायदा क्या हुआ? हुड्डा ने कहा कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 15 से 17 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। इस प्रस्ताव से घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और जनता को महंगी बिजली का झटका लगेगा। सवाल ये है कि अगर निगम घाटे में हैं, तो सरकार की क्या जिम्मेदारी है? क्यों नहीं सरकार अपनी अक्षमता को सुधार कर घाटा कम करने की दिशा में काम कर रही? क्यों नहीं हरियाणा में कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित बिजली उत्पादन व वितरण तंत्र का उचित उपयोग किया जा रहा? क्यों अपनी नाकामियों का बोझ बार-बार महंगी बिजली करके जनता के सिर पर धरा जा रहा है?
भाजपा पहले ही स्लैब में बदलाव करके जनता को जोरदार झटका दे चुकी
नेता प्रतिपक्ष ने पिछले साल हुए बिजली दरों के बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा पहले ही स्लैब में बदलाव करके जनता को जोरदार झटका दे चुकी है। अप्रैल 2025 से बिजली के दाम चार गुना बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी की कमर तोड़ दी थी। उदाहरण के तौर पर, जहां पहले बिजली बिल 900 रुपये आता था, वो सीधे 4000 रुपये हो गया। क्योंकि सरकार ने प्रति किलोवाट 75 रुपये का फिक्स्ड चार्ज लगा दिया और स्लैब में बड़ा बदलाव भी कर डाला। जून में जिन लोगों के बिल आए, उनमें नया स्लैब लागू किया गया, जिसमें 5 किलोवाट से ऊपर के कनेक्शन पर भारी-भरकम बिल भेजे गए। 500 यूनिट तक के खर्च पर प्रति यूनिट 6.50 रुपये और प्रति किलोवाट 75 रुपये फिक्स्ड चार्ज है, जबकि 500 से 1000 यूनिट पर 7.15 पैसे प्रति यूनिट और 75 रुपये प्रति किलोवाट।